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हालातों की सीख़ - मन की बात नेहा के साथ

 "जब परिस्तिथिया हमारे अनुकूल नहीं होती तो यक़ीनन कुछ पलों के लिए कमजोर या असहाये महसूस होना स्वाभाविक है लेकिन फिर उन्ही परिस्तिथियों से उभर कर जो एक रूप सामने आता है, वो पहले से और अधिक मजबूत और स्थिर होता है.............।

 



रीति रोज़ रात के समय अक्सर टहलने के लिए निकलती थी !! रीत की टहलने की जगह भी तय थी !! रोज़ रीत शहर के अधिक चहल पहल वाले इलाके से दूर कम भीड़ भाड़ वाली, शांत सी जगह पर अकेले टहलने के लिए जाया करती थी !! आज रीत टहल रही थी कि एक बुजुर्ग सा आदमी उम्र लगभग 65 साल होगी भी वही से गुजर रहा था। जैसे ही वो आदमी रीत से थोड़ी आगे निकला कि एक बाइक सवार लड़के ने बहुत तेज स्पीड से बाइक पर आते हुए उस आदमी को टक्कर मार दी थी !! मानो वो लड़का जैसे अपने होश में ही न हो !! टक्कर मारते ही लड़के ने अपनी बाइक की स्पीड और तेज बढ़ाई और वहाँ से निकल गया !! रीति भागते हुए उस आदमी के पास पहुंची !! 


 


आदमी के पास जा कर देखा तो खून से वो आदमी लतपथ हो चूका था !! रीत घबरा गयी थी !! शांत सी वो जगह, कोई मदद के लिए भी नहीं दिख रहा था !! उस आदमी की तड़प देखते रीत रोते हुए इधर उधर किसी को मदद के लिए तलाश रही थी !! एक दो गाडी वहाँ से निकली भी लेकिन किसी ने इस दुर्घटना में ना पड़ना ही सही समझा............!! एक भी गाडी नहीं रुकी थी अब तक !! समय बर्बाद ना करते हुए रीति ने एम्बुलेंस को फ़ोन कर दुर्घटना की जानकारी दी और अपने घर वालो को भी खबर दी !!


रीत के घर वाले जब तक दुर्घटना स्थान पर आते, एम्बुलेंस आ कर उस आदमी और रीत को ले जा चुकी थी !! जैसे तैसे घबराई हुई रीत ने सब कुछ मैनेज किया था !! अस्पताल में भी पुलिस को घटना की जानकारी देना और उनके कई प्रश्नो का जवाब.............!! रीत बस उस आदमी के बचने की दुआ कर रही थी !! 

 

 


डॉक्टर्स के मुताबिक उस आदमी को गंभीर चोटे आयी थी और उम्र भी ज्यादा होने के कारण अभी कुछ भी कहना मुश्किल था !! उस आदमी ने तड़पती हुई आवाज में अपने घर का पता रीत को बताया था, जिन्हे रीत ने जैसे तैसे अब खबर कर दी थी !! अस्पताल में पहुंचे उस आदमी के परिजनों की घबराहट देख रीत को अपने अतीत का वो सबसे दुखत किस्सा याद आया जब रीत के पापा भी यूँ ही एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे और जिस कार से ये दुर्घटना हुयी थी, उस कार चालक ने कार से निकल कर एक नजर देखना भी जरुरी नहीं समझा था !! बस एक नौजवान लड़के ने रीत के पापा को अस्पताल पहुंचाया था !


रीत के पापा बहुत समय बाद इस दुर्घटना के जखम और चोटों से उभर पाए थे !! उस नौजवान का रीत और उसका परिवार आज भी शुक्रिया करते नहीं थकते !! वो नौजवान रीत के परिवार के लिए किसी हीरो से कम नहीं !! रीत के परिवार के लिए वो नौजवान किसी फ़रिश्ते से कम नहीं !! रीत ने उस दिन बहुत कुछ सीखा था !! 

इन हालातो में कैसा दुःख और बेचैनी महसूस होती है ये रीत भली भाँती जानती थी !! इन हालातो से रीत गुजर जो चुकी थी !! 


रीत उस आदमी के बेटो की बेचैनी को महसूस कर रही थी !! उस आदमी की बुजुर्ग पत्नी के आंसू रीत को और आहत कर रहे थे !! रीत के दिमाग में बस एक ही सवाल घूम रहा था कि वो लड़का जिसने इतनी बेरहमी से इस बुजुर्ग आदमी को टकराते हुए अपनी बाइक तेज स्पीड से आगे बढ़ा ली, भला आज के बाद चैन की नींद कैसे सो पायेगा.......!! क्या मानवता आज मात्र शुन्य हो गयी है !! क्या इंसान का जमीर मर चूका है !! क्या उस लड़के की अंतर-आवाज उससे सवाल नहीं करेगी !! इस बुजुर्ग आदमी की जान बची होगी या जान चली भी गयी होगी, क्या ये सवाल उसे टटोलता नहीं होगा !!

 


 


बस इन्ही ख्यालो और प्रश्नो से उलझी रीत को डॉक्टर से आखिर पता चला कि अब इन बुजुर्ग आदमी का स्वस्थ पहले से बेहतर है और डरने की अब कोई बात नहीं..........। हाँ लेकिन अभी बहुत दिन लगने वाले थे उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने में !! लेकिन सबके चेहरों पर अब एक ख़ुशी थी !! 

उनके परिजनो ने रीत का आभार व्यक्त किया और अब रीत तसल्ली मन से घर वापसी के लिए निकली, रात भी काफी हो चुकी थी लेकिन मन में आज अलग ही रौशनी जगी थी, किसी की मदद करने के बाद ख़ुशी की चिंगारी आज दिल में जगी थी !! आज रीत ने भी एक परिवार के लिए हीरो जैसा किरदार निभाया था !! रीत ये सब अतीत में बीते हालात से सीखा था !! उन दर्द ने रीत को और भी मजबूत बनाया था और इस बात का एहसास रीत को आज हुआ था !!
 
अक्सर बुरे हालात में कदम डगमगा जाते है, पर भविष्य में उन्ही बुरे हालातों के अनुभव ही तो हमें संभलने में मदद भी करते है............।

Thank You....


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