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पहचान - माँ से जुड़ा एक नाम !!

जो जैसा हमेशा से होते आया है उसे वैसे ही चलते रहने देना आसान है लेकिन मुश्किल और कठिनाई तो बदलाव को स्वीकारने में होती है और बदलाव के लिए एक पहल करना तो संघर्ष से कम नहीं होता..........!! 




दिव्यांश अपनी माँ के साथ जयपुर में अपनी सरकारी नौकरी के स्थानांतर (transfer) के चलते रहने आया था । माँ बेटे अकेले ही थे बस, जहा जहा दिव्यांश का स्थानांतर होता दिव्यांश अपनी माँ के साथ वहाँ रहने चला जाता !! दिव्यांश की नौकरी एक सरकारी बैंक में थी !! दिव्यांश को माँ का सहारा था और माँ को दिव्यांश का !! और कोई था ही नहीं जो उनके साथ उनके परिवार का हिस्सा हो, माँ बेटे से ही बस ये छोटा सा परिवार था !!


दिव्यांश का आज पहला दिन था ऑफिस में, लेकिन ऑफिस में दिव्यांश के आने से पहले ही उसका नाम चर्चा का विषय बना हुआ था !! दिव्यांश के टेबल पर दिव्यांश के पुरे नाम की नाम प्लेट देख हर कोई अलग ही प्रतिकिर्या दिखा रहा था और ये कानाफूसी दिव्यांश के ऑफिस में आ जाने के बाद तक भी जारी थी !!


दरअसल दिव्यांश का पूरा नाम दिव्यांश संगीता त्रिपाठी था और सबको ये नाम देख गंभीर हैरानी थी कि कैसे नाम में एक औरत का नाम जुड़ा था !! जैसे दिव्यांश अपने ऑफिस में दाखिल हुआ कि उसने ऑफिस के ही एक कर्मचारी को नाम प्लेट के नाम में कुछ गड़बड़ी होने का अंदेशा जताते नाम प्लेट को फिर से चेक करने के लिए कहा !! 


बस इतने में दिव्यांश वहाँ पहुंच गया और नाम बिलकुल सही होने की पुष्टि करते नाम प्लेट को टेबल पर ही रहने देने के लिए कहा !! बस फिर क्या था फिर से कानाफुंसी चालु थी, हो भी क्यों न........... भले ही आज समाज कितना भी बदल गया हो, भले ही लोगो ने कितनी ही तरक्की कर ली हो, भले ही लोगो की सोच पहले से कितनी आधुनिक हो गयी हो, भले ही समाज के नियमो में कई बदलाव किये गए हो पर कुछ नियम तो जस के तस चलते आ रहे है और उन नियमो को निभाना बस एक अनिवार्य गतिविधि जैसा है !! 


जैसे समाज का बनाया एक नियम ये भी है कि किसी बच्चे के नाम के साथ उसके पिता का नाम जुड़ता है फिर चाहे वो लड़की है या फिर लड़का, और अगर लड़की है तो शादी के बाद उसके नाम के साथ उसके पति का नाम जुड़ जाने का नियम........!! आखिर इसीलिए तो कहते है इस समाज को पुरुष-प्रधान समाज............ कोई कितना भी इस बात से पलट जाए, चाहे हम कितने भी आधुनिक हो जाए लेकिन कुछ नियम आज भी वैसे ही है जैसे थे !! 


दिव्यांश को ऑफिस में काम करते अब 2-4 दिन बीत चुके थे, अब कई कर्मचारियों के साथ दोपहर के खाने पर बात चीत भी होने लगी थी कि एक कर्मचारी के उसके नाम पर हैरानी जताते पूछने पर दिव्यांश ने बताया कि दिव्यांश संगीता त्रिपाठी नाम में संगीता नाम उसकी माँ का है !! जबसे दिव्यांश ने होश संभाला है तब से माँ को ही तो पिता का हर फ़र्ज़ निभाते देखा था उसने !! दिव्यांश के पिता जी तो दिव्यांश और उसकी माँ को कई सालो पहले छोड़ गए थे, उन्होंने माँ संगीता को तलाक दे दूसरी शादी जो कर ली थी !! माँ ने हर जिम्मेदारी निभायी थी, हर फ़र्ज़ माँ ने पुरे किये थे, पिता ने जो फ़र्ज़ निभाने तो दूर निभाने का सोचा तक नहीं, माँ ने उन्हें पूरा कर दिव्यांश को इतना काबिल बनाया था !! उस समय दिव्यांश केवल 2 साल का था जब पिता ने उन्हें छोड़ दूसरे शहर में अपना घर बसाया था !! 





दिव्यांश को माँ ने जब पहली बार उसका नाम लिखना सिखाया था, बोलना सिखाया था तो दिव्यांश के नाम के साथ पिता का नाम भी चमकाया था !! पर जैसे जैसे दिव्यांश बड़ा होते गया, अपने नाम के साथ पिता का नाम खटकने सा लग गया !! दिमाग ने ये ही कहा कि आखिर क्यों इन नियमो का पालन करना जब उस पिता ने ही सब नियमो की उलंघना कर कभी मुड़ कर नहीं देखा !! जब एक पिता ने अपने फ़र्ज़ से मुँह मोड़ लिया तो क्या हक़ था दिव्यांश के नाम के साथ उनके नाम को जोड़ने का....... रिश्ता ही जब अधूरा था तो एक नाम भला क्या पूरा कर सकता था उसे !! 


बस दिव्यांश को याद भी नहीं कि कबसे उसने अपने नाम के साथ माँ का नाम जोड़ना शुरू कर दिया था !! जो दिल को सही लगा वही तो किया, उसने अपनी मन की बात सुनी थी बस !! लेकिन ऑफिस में हुई नाम को लेकर जैसी फुसफुसाहट आज पहली बार नहीं थी.......... पहली भी नजाने कितनी बार दिव्यांश को नाम को लेकर सफाई देनी पड़ी थी !! इन बातों से दिव्यांश परिचित था ही कि इस नाम को आसानी से लोग स्वीकार ले ऐसा आधुनिक समाज आज भी नहीं !! 


पर दिव्यांश को इस बात की ख़ुशी थी कि वो बदलते समाज की एक पहल है....... और कम से कम शर्तों से भरे इस समाज की इस बेतुकी शर्त का हिंसा नहीं है !! 


नाम के साथ नाम चाहे माँ का हो या पिता का, ये कोई मज़बूरी नहीं एक चॉइस (choice) होनी चाहिए और किसी भी माईने में स्वीकारा जाना चाहिए......... जबकि ऐसा कोई कानून नहीं जो इस तरह के नियमो की पुष्टि करता हो, कानूनन तौर पर माँ या पिता में से किसी का भी नाम बच्चे के नाम से जोड़ा जा सकता है पर उसके लिए समाज को फुसफुसाहट की आवाज शायद मिटानी होगी...........!!


ये सच्च है की आधुनिक समय में भी आखिर माँ का नाम केवल जन्म सर्टिफिकट (birth-certificate) में ही लिख कर रह जाता है !! 


एक बदलते समाज की उम्मीद में मेरा ये ब्लॉग............ आप सबके सामने..........।  

Thank You..........

mann-ki-baat-by-neha

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