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फ़रिश्ते का रूप - मन की बात नेहा के साथ

फ़रिश्ते का रूप - मन की बात नेहा के साथ


किसी की मदद करना अच्छी बात तो है ही...... लेकिन किसी की ऐसी मदद कर देना कि फिर वो किसी की मदद का मोहताज ही न रहे, उससे भी अच्छी बात.... !! ऐसी नेकी करने वाले को फ़रिश्ते का रूप कह देना शायद गलत नहीं होगा !! 



 

एक भीड़ भाड़ से भरी सड़क.......!! और कई लोगो की भीड़ में कई गाड़ियों का आना जाना.......!! पास ही में सिग्नल.....!!

पूरी सड़क भरी हुयी थी और पास ही के सिग्नल पर एक बड़ी सी गाडी आ कर रुकी, गाडी में अच्छा सा सूट बूट पहने एक शक्श था, उम्र में करीब 55 साल का होगा शायद....| गाडी और उस व्यक्ति के कपडे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे खूब पैसे वाले लोग हो..!! असल में उस गाडी में बैठने वाले शक्श का नाम विराट माहेश्वरी है |

गाडी में बैठे उस आदमी की नज़र पास ही के सिग्नल पर door mat बेचते एक छोटे से लड़के पर पड़ी | लड़का कुछ 12 साल का होगा !! इतनी सी उम्र और कड़ी धुप में इतना कठिन काम.......!! उस लड़के को हर किसी की गाडी पर जा जा door mat को खरीद लेने के लिए बोलता देखना बहुत दर्दनिये था...!! वो छोटा सा लड़का धुप की गर्मी से पसीने में भीगा हुआ था !! तन पर बस एक बनियाइन, निचे फटी हुयी पैंट.......!! सिग्नल पर रूकती हुयी गाड़ियों की और भाग कर जाता वो लड़का जैसे हर बार कितनी उम्मीद होती आँखों में कि शायद इस गाडी में बैठा कोई उसका सामान खरीद ही लेगा..!! 

विराट माहेश्वरी जी के देखते ही देखते उस लड़के ने कम से कम 10 गाड़िया की खिड़की में झांकते हुए अपना सामान खरीद लेने के लिए बिनती की होगी..!! विराट जी का ये देखते दिल दुःख रहा था जैसे !! कितना मजबूर होगा वो बच्चा जो नंगे पैर तपती गर्मी में पसीने से लथ पथ बस भाग रहा था हर रूकती गाडी के पीछे !!

बस विराट जी की गाडी भी रुकते ही वो लड़का विराट जी की गाडी की और भागा..| 

"बाबू जी एक door mat ले लो, देखिये तो कितना सुन्दर है !! मेरी माँ ने अपने हाथो से बनाया है !! आपके घर की सुंदरता इसे लगाने से और बढ़ जायेगी बाबू जी..... एक तो ले लो" - उसके मुँह से बाबू जी शब्द सुन जैसे विराट जी के दिल में उतर आया वो लड़का !!

विराट जी उसके चेहरे की और बहुत ध्यान से देखते रहे.. उस लड़के की आँखे जैसे विराट जी के चेहरे के हाव भाव में ये तलाश रही थी कि क्या ये मेरा सामान खरीदेंगे या सबकी तरह ये भी मना कर देने वाले है.....!! उसके चेहरे की परेशानी साफ़ दिख रही थी....!! इतना छोटा बच्चा मजबूरियों को भी क्या खूब समझ रहा था !! शायद हालात ने उसे वक़्त से पहले बड़ा जो कर दिया था !!

विराट जी ने उसके हाथो में पकडे हुए सारे door mat उन्हें दे देने के लिए कहा !! लड़का बहुत हैरानी से विराट जी की और देखते रह गया !! लड़के के चेहरे पर ऐसी ख़ुशी थी जैसे आज कोई बड़ी मुश्किल हल हो गयी हो उसकी.....!! विराट जी ने उसे उसके पैसे देते हुए, उसे एक बिस्कुट का पैकेट खाने के लिए दिया |

"पढ़ाई भी करते हो न..??" - विराट जी ने कार में से बाहर झांकते हुए पूछा |

लड़के ने बस मुँह हिला कर ना में जवाब दिया !!

"घर कहा है तुम्हारा" - विराट जी ने अगला प्रश्न किया |

"बस पास ही में है बाबू जी" - लड़के ने वही फुटपाथ के पास वाली झोपडी की और ऊँगली से इशारा करते हुए कहा |

सिग्नल खुला और विराट जी वहाँ से निकल गए | लेकिन विराट जी के मन में कुछ तो कचोट रहा था !! जैसे बेचैनी हो रही थी !! उस लड़के का चेहरा आँखों के आगे बार बार आ रहा था और दिमाग में उसकी मज़बूरी को जानने की इच्छा....... दिल में उसका बाबू जी कहना एक अलग जगह बना चूका था !!

विराट जी ने दिन भर अपने कामो में खुद को व्यस्त रखा पर रात में फिर से वही विचार जैसे सोने नहीं दे रहे थे !! समय देखा तो रात के 10 बजे थे | विराट जी ने तुरंत गाडी निकाली और वही सड़क के पास जा कर गाडी को खड़ा कर उस छोटी सी झोपडी की और बढ़ ही रहे थे कि उन्होंने उसी बच्चे को झोपडी के पास उसका सोने के लिए बिस्तर लगाते देखा !! पास गए तो वो लड़का भी विराट जी को देख खड़ा हो गया !! 

"बेटा, क्या नाम है तुम्हारा" - विराट जी ने बहुत प्यार से उसकी और देखते पूछा |

"जी राजू....... राजू नाम है मेरा" - बच्चे ने जवाब दिया |

"कोई गलती हुई क्या बाबू जी, door mat अच्छे नहीं है क्या बाबू जी !!" - लड़के ने परेशान होते हुए जवाब दिया |

"बहुत सुन्दर है तुम्हारे door mat" - विराट जी ने जवाब दिया |

राजू की माँ अंदर से झांकते हुए बाहर आयी.....

"आप कौन साहिब" - कोई गलती हुई क्या राजू से !!

"मैं राजू का स्कूल में दाखिला करवाना चाहता हूँ, क्यों राजू पढोगे न.........??" - विराट जी ने राजू की और देखते हुए कहा |

उस बच्चे की मन की बात जैसे विराट जी ने पढ़ ली थी.........!!

"अरे साहिब, हम इतना खर्चा नहीं उठा सकते है, आप दाखिला करवा देंगे पर आगे की पढ़ाई, किताबे.... हम सोच भी नहीं सकते साहिब" - राजू की माँ ने हाथ जोड़ते कहा |

"राजू आगे जितना भी पढ़ना चाहेगा हमेशा उसकी पढ़ाई का खर्चा मेरी तरफ से होगा" - विराट जी ने राजू की माँ को सरलता से समझाते हुए कहा |

"पर साहिब, इतना बड़ा एहसान आप क्यों करेंगे हम पर, हम आपका ये एहसान चुकाने का सोच भी नहीं पाएंगे" - राजू की माँ ने थोड़ा घबराते हुए कहा |

इसमें एहसान कुछ भी नहीं, विराट जी अपना फ़ोन नंबर देते हुए वहाँ से वापिस चल दिए !! 

वापसी समय विराट जी अपनी कार में बैठते अपना बचपन याद कर रहे थे जो उन्होंने आज राजू में देखा था !! विराट जी की कहानी भी राजू जैसी ही तो है................!! विराट जी कुछ 15 साल के थे जब यूँ ही सड़क के किनारे फूल बेचा करते थे और यूँ ही एक बाबू जी ने विराट जी को अपना सहारा दिया था..!! विराट जी का कोई भी नहीं था !! एक चाय बेचने वाले आदमी के साथ विराट जी का बचपन जैसे तैसे कट रहा था और फिर एक दिन एक बाबू जी ने विराट जी के बारे में पता किया.... जब पता चला कि विराट जी का कोई अपना नहीं है तो उन्होंने विराट जी को अपने घर में शरण दी, पढ़ाया लिखाया !! 

और हकीकत आज सबके सामने थी विराट जी आज नामी गामी व्यापारी है और कई और भी बच्चो को हर साल पढ़ाई के लिए सहयोग करते है जिनमें अब राजू का भी नाम शामिल था !! राजू का विराट जी को बाबू जी बोलना, विराट जी को उन्ही दिनों में ले गया जब उनकी जिंदगी में भी एक बाबू जी ने आ कर सब कुछ बदल दिया था !! 

वो बाबू जी किसी फ़रिश्ते से कम नहीं थे विराट जी के लिए और आज विराट जी को किसी का फरिश्ता बनने का सौभाग्य मिला था 

ये नेक काम केवल विराट जी ही नहीं, उन्होंने अपने दोनों बच्चो को भी ऐसी परवरिश के साथ बड़ा किया है कि वो भी विराट जी को इस नेक काम में पूरा सहयोग करते है.......|

क्या पता कल को राजू जैसे और कितने बच्चे भविष्य में और भी कई बच्चो के लिए फरिश्ता बन कर आये और ये नेक काम कितनो की ज़िंदगी सवार दे............!!



एक बाबू जी ने विराट जी की ज़िंदगी सवार दी थी और विराट जी आज नजाने कितने बच्चो के लिए बाबू जी का प्रतिनिबद्ध है.... उस फ़रिश्ते का रूप है ...!! कल इनमें से हर बच्चा एक और नयी ज़िंदगी को भी सवार सके तो इससे नेक और क्या होगा भला..............!!

नेकी का बोया एक बीज जाने कितने लोगो को घनी छाया दे सकता है.............!! नेकी बोते रहे, नेकी करते रहे.......!!

Thank You......

mann-ki-baat-by-neha  


disclaimer : इस कहानी के सभी पात्र (विराट जी, राजू, अन्य सभी चरित्र) काल्पनिक है | यहाँ पर लिखी सभी कहानिया किसी भी धर्म, मानवता के विपरीत नहीं है | यह केवल एक मन की बात है जो केवल readers को entertainment (मनोरंजन) करने के लिए है | यहाँ जो भी content है उसके सारे copyright mannkibaatbyneha के है..|

 

 

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